say no to terrorism

Ek nayi duniya banayein…

WIB ORIGINAL
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Terrorism will spill over if you don’t speak up

– Malala Yousafzai

Aantankwad ki is aag mein ye puri duniya jal rahi hai,
Kahin foot rahe bam to kahin goliyan chal rahi hai.

Is nafrat ki aag ko ab bujhane ki zarurat hai,
Is aag ko bhadkana sirf kaayaron ki harkat hai.
Mere aur tumhare mazhab ke naam par ye thagi ho rahi hai,
Shabd ho gaye hain paraaye aur bandookein sagi ho rahi hai.

Kab tak is soch ki wajah se maasoomon ka khoon bahega,
Nanha sa uska beta mara hai, uski maa se ye kaun kahega.
Dehshatgardi mein kitno ki jaane gai, kitno ke sapne toot gaye,
Ahankaar ki is jung mein, apne apno se choot gaye.

Sarhad ke us taraf bhi insaan hai aur sarhad ke is taraf bhi insaan hai,
Mazhab ke naam par katal karne mein na jaane kaun si shaan hai.
Uri, Pulwama, Sukma jaise hamlon ko milkar rokna hoga,
Hum sabko apni galtiyon se ab kuch seekhna hoga.

Aane waali peedhi ko aao kuch accha sikhayein,
Apne karm sudhaarein aur is duniya ko swarg banayein.
Nafrat le jaayegi is jahaan ko dozakh mein,
Aao apne ghar ko, mulk ko aur is sansaar ko bachayein.


एक नई दुनिया बनाएं..

मैं किसी भी परिस्थिति में जान से मारना या हत्या करना या आतंकवाद को अच्छा नहीं मानता ।

– महात्मा गाँधी

आतंकवाद की इस आग में ये पूरी दुनिया जल रही है,
कहीं फूट रहे बम तो कहीं गोलियां चल रही है ।

इस नफरत की आग को अब बुझाने की ज़रूरत है,
इस आग को भड़काना सिर्फ कायरों की हरकत है ।
मेरे और तुम्हारे मज़हब के नाम पर ये ठगी हो रही है,
शब्द हो गए हैं पराये और बंदूकें सगी हो रही है ।

कब तक इस सोच की वजह से मासूमों का खून बहेगा,
नन्हा सा उसका बेटा मरा है, उसकी माँ से ये कौन कहेगा ।
दहशतगर्दी में कितनो की जाने गई, कितनो के सपने टूट गए,
अहंकार की इस जंग में, अपने अपनों से छूट गए ।

सरहद के उस तरफ भी इंसान है और सरहद के इस तरफ भी इंसान है,
मज़हब के नाम पर क़त्ल करने में ना जाने कौन सी शान है ।
उरी, पुलवामा, सुकमा जैसे हमलों को मिलकर रोकना होगा,
हम सबको अपनी गलतियों से अब कुछ तो सीखना होगा ।

आने वाली पीढ़ी को आओ कुछ अच्छा सिखायें,
अपने कर्म सुधारें और इस दुनिया को स्वर्ग बनाएं ।
नफरत ले जायेगी इस जहां को दोज़ख में,
आओ अपने घर को, मुल्क को और इस संसार को बचाएँ ।

2 comments

  • क्या ख़ूब लिख दिया है, देता है दिल दुआएँ ,
    ऐसी ही सोच रख कर, सबको गले लगाएँ ।
    लिखते रहो सदा तुम, हम सबकी आरज़ू है ,
    हम साथ हैं तुम्हारे, आओ, दुनिया नई बनाएँ ।।

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